एक थे दशरथ मांझी। इनके बारे में तो आपने खूब सुना, जिन्‍होंने अकेले ही एक विशालकाय पहाड़ को तोड़कर सड़क बनवाई थी। लीजिए, इन पर तो फिल्‍म भी बन गई। वहीं अब वक्‍त है दूसरे दशरथ मांझी से मिलने का। छत्तीसगढ़ के कोरिया जिले के चिरमरी इलाके में रहने वाले श्याम लाल के बारे में सुनने का। पता है आपको कि इन्‍होंने क्‍या किया। अजी, इन्‍होंने खुद के अकेले दम पर तालाब बना डाला। है न हैरतंगेज।

ऐसी है जानकारी
जी हां, ये सच है कि छत्‍तीसगढ़ के श्याम लाल ने अकेले ही अपने गांव में पानी की किल्‍लत को दूर करने के लिए यहां पूरा एक तालाब खोद डाला। दरअसल इनके गांव में बरसों से पानी की किल्लत थी, लेकिन सरकार ने कभी गांव की इस जरूरत पर कोई ध्‍यान नहीं दिया। न तो इस गांव में बिजली थी और न ही पानी।

इनसे मिलकर चौंक जाएंगे आप
ये जानकर आप चौंक जाएंगे कि 15 साल की उम्र में श्‍याम लाल ने अपने गांव में पानी की जरूरत को पूरा करने की ठान ली। उन्‍होंने न सिर्फ इसके बारे में ठाना, बल्‍कि 27 साल की मेहनत के बाद अब उसे पूरा भी कर दिखाया। अब जब उनकी ये मेहनत रंग लाई तो तालाब बनने के बाद पूरे गांव को पानी तो मिल ही गया, साथ ही में मछली पकड़कर यहां के लोगों को रोजी-रोटी कमाने में भी मदद मिल रही है।


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माउंटमैन की कहानी थी ऐसी
इससे पहले आपने भी बिहार में गया के करीब गहलौर गांव में दशरथ मांझी के माउंटन मैन बनने के बारे में सुना। उनके ऐसा करने के पीछे उनकी पत्नी का ज़िक्र आया। गहलौर और अस्पताल के बीच खड़े जिद्दी पहाड़ की वजह से 1959 में उनकी बीवी फाल्गुनी देवी को वक्‍़त पर इलाज नहीं मिल सका और उन्‍होंने दुनिया को अलविदा कह दिया था। यहीं से शुरू किया था दशरथ मांझी ने अपने इंतकाम का सफर।

पत्‍नी बनी थी इस जोश का कारण
पत्नी के चले जाने के दशरथ मांझी ने मन ही मन ठान लिया कि वह इस पहाड़ को झुका कर रहेंगे, जिसकी वजह से उनकी पत्‍नी की जान गई। हालांकि उनके लिए ये करना आसान नहीं था। शुरुआत में लोग उन्हें पागल समझते थे। वहीं दशरथ मांझी ने खुद बताया था कि गांववालों ने शुरू में कहा कि वह पागल हो गए हैं, लेकिन लोगों के तानों ने उनका हौसला और बढ़ा दिया था।

सच कर दिखाई मेहनत
ठीक वैसे ही श्‍यामलाल ने भी अपने जुनून को सच कर दिखाया है। अपने गांव की दिक्‍कत को उन्‍होंने अपनी 27 साल की मेहनत से दूर कर दिखाया है। जाहिर तौर पर इन्‍हें भी इनकी इस मेहनत के सफर पर जरूर दीवाना या पागल समझा गया होगा, लेकिन इन्‍होंने भी ऐसी किसी बात की परवाह नहीं की। आखिरकार सच कर दिखाया अपनी मेहनत के कारनामे को।

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