जैसे बरसात के आने पर मेंढक की टर्र टर्र शुरू हो जाती है. कुछ इसी तरह चुनाव आने पर नेताओं की भी टर्र टर्र साफ़ सुनी जा सकती है. वादों पर वादे शुरू हो जाते हैं और बार-बार एक ही रटा रटाया वाक्य सुनाई देता है कि फलां निशाँ वाला बटन दबाना. लेकिन हालिया विधानसभा चुनावों में इस्तेमाल की गई ईवीएम मशीनों पर जब सवाल उठाये गए तो कोर्ट के आदेशानुसार वीवीपीएटी मशीन लगाने की बात सामने आई थी. लेकिन अब मुसीबत ये है कि चुनाव आयोग के पहले लेवल के टेस्ट में ही ये मशीन चोक ले गई.

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वीवीपीएटी मशीन


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भैया जी अगर ये बात आपकी समझ में नहीं आई तो इसे ऐसे समझ लीजिये कि गुजरात विधानसभा चुनावों में वीवीपीएटी की मशीनें प्रयोग की जानी थीं. इन मशीनों को जब चुनाव आयोग ने टेस्ट करने की कोशिश की तो पहले लेवल के टेस्ट में ही ये मशीनें फेल हो गईं. फेल हुई मशीनों की संख्या भी 1-2 या 10-12 नहीं बल्कि 3550 है. अब सोचने वाली बात ये है कि अगर इतनी मशीनें पहले लेवल का टेस्ट पास नहीं कर पाई हैं तो फिर चुनाव का हाल क्या होने वाला है.

दरअसल गुजरात चुनाव में इस्तेमाल की जाने वाली 3550 वीवीपीएटी यानी वेरीफाइड पेपर ऑडिट ट्रेल मशीनें चुनाव आयोग ने खराब पाई हैं. इनमें सबसे ज्यादा खराब वीवीपीएटी मशीनें जामनगर, देवभूमि द्वारका और पाटन जिले में पाई गईं. गुजरात में कुल 70,182 वीवीपीएटी मशीनें इस्तेमाल की जाने वाली हैं. ऐसे में इतनी ज़्यादा तादाद में मशीनों का खराब होना बड़ी बात है.

गुजरात के मुख्य चुनाव आयुक्त बीबी स्वाईं का कहना है कि खराब मशीनों को कारखाने में वापस भेजा जाएगा. जिन मशीनों में मामूली तकनीकी खराबी है उन्हें दुरुस्त किया जा सकता है.

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एक वरिष्ठ चुनाव अधिकारी का कहना है कि खराब पाई गईं वीवीपीएटी मशीनों में सेंसर के काम न करने, प्लास्टिक के पुर्जों के टूटे हुए होने और मतदान ईवीएम से जोड़ने में दिक्कत आ रही है. वो तो भला हो जो चुनाव आयोग पहले से ही सतर्क था, इसीलिए उसने पहले से ही उसने मतदान के दौरान खराब हो जाने वाली वीवीपीएटी को बदलने के लिए 4150 अतिरिक्त मशीनें मंगवा कर राखी हैं. गुजरात में कुल 182 विधान सभा सीटे हैं और यहाँ दो चरणों में मतदान होगा.

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