केंद्रीय मंत्रिमंडल ने तीन तलाक के कानून के मसौदे को मंजूरी दे दी है। इसमें कहा गया है कि एक साथ तीन तलाक बोलना गैर-जमानती और संज्ञेय अपराध होगा। ऐसा करने वाले पति को तीन साल के कारावास की सजा हो सकती है। मजिस्ट्रेट जुर्माना भी कर सकते हैं।

चिट्ठी से तीन तलाक देने पर भी होगा लागू

मसौदा के तहत किसी भी तरह का तीन तलाक (बोलकर, लिखकर या ईमेल, एसएमएस और व्हाट्सएप जैसे इलेक्ट्रॉनिक माध्यम से) गैरकानूनी होगा। तीन तलाक के कानून का प्रभाव सिर्फ एक बार में तीन तलाक (तलाक-ए-बिद्दत) के मामले पर होगा।

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बच्चों की कस्टडी मांग सकेगी पीड़ित महिला

यह कानून पीड़िता को अपने और नाबालिग बच्चों के लिए मजिस्ट्रेट से गुहार लगाने की शक्ति देगा। पीड़ित महिलाएं मजिस्ट्रेट के पास जाकर  खुद और बच्चों के लिए भरण पोषण के लिए भत्ता मांग सकती हैं। महिला अपने बच्चों की कस्टडी भी मांग सकती है।

जम्मू-कश्मीर छोड़ पूरे देश में होगा लागू

तीन तलाक के कानून के तहत जिन महिलाओं को तीन तलाक दिया जा चुका है वे महिलाएं भी अपने नाबालिग बच्चों की कस्टडी और गुजारा भत्ता मांग सकेंगी। प्रारूप के अनुसार नया कानून जम्मू और कश्मीर को छोड़ कर देश के सभी राज्यों में लागू होगा।

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पुराने कानून में नहीं है व्यवस्था

देश में लागू कानून के अनुसार तीन तलाक और तलाक-ए-बिद्दत की पीड़ित के समाने को कोई कानूनी विकल्प नहीं है, वह सिर्फ पुलिस के पास जा सकती है क्योंकि मुस्लिम मौलाना उसकी कोई मदद नहीं कर सकते। यहां तक कि पुलिस भी इस मामले में असहाय है क्योंकि इस बारे में कोई भी दांडिक प्रावधान वजूद में नहीं है।

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