राजनीति का असली रंग चुनाव के करीब आते ही दिखाई देने लगता है. चुनाव की तारीख जैसे-जैसे नज़दीक आती जाती है, पार्टियाँ एक दूसरे पर हमलावर दिखाई देने लगती हैं. वही काम हालिया विधानसभा चुनावों की तारीख के करीब आते-आते भाजपा और कांग्रेस में खूब देखने को मिल रहा है. पहले जहाँ कथित तौर पर अमित शाह के बेटे जय शाह की कंपनी की कमाई अचानक हज़ारों करोड़ गुना बढ़ने की बात को लेकर राहुल भाजपा पर हमलावर थे. तो इस बार अजित डोवल के बेटे को लेकर भी उन्होंने निशाना साधना शुरू किया है.

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डोवल के बेटे पर राहुल का निशाना

डोवल के बेटे


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दरअसल हालिया हमला राहुल ने ट्विटर के ज़रिये भाजपा पर बोला है जिसमें राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार अजित डोवल के बेटे शौर्य को लेकर उन्होंने लिखा है कि ‘शाह-जादा की अपार सफलता के बाद भाजपा की नई पेशकश अजित शौर्य गाथा.’ इसके साथ ही उन्होंने एक वेबसाइट की खबर भी शेयर की है. वेबसाइट ‘द वायर’ में अजित डोवाल के बेटे को लेकर बेहद चौंकाने वाले खुलासे किए गए हैं.

डोवल के बेटे

वेबसाइट का दावा

वेबसाइट के अनुसार एनएसए अजित डोवाल के बेटे शौर्य डोवाल की संस्था ‘इंडिया फाउंडेशन’ में मोदी सरकार के मंत्रियों के शामिल होने का दावा तो किया ही गया है. इसके अलावा फाउंडेशन को देशी-विदेशी कंपनियों से लाभ पहुंचने का दावा किया गया है. दावा है कि शौर्य डोवल की संस्था 2014 से पहले तक केरल में जबरन धर्म परिवर्तन जैसे मुद्दों पर ग्राफिक्स डिजाइन करती आई है.

वेबसाइट में इस बात का दावा भी किया गया है कि ये संस्था 2009 से काम कर रही है. लेकिन 2014 के बाद से संस्थान की गतिविधियों में अप्रत्याशित तेजी देखने को मिली है. 2014 के बाद संस्थान के ग्राफ में आई इस अप्रत्याशित वृद्धि को लेकर ही वेबसाइट की खबर में सवाल उठाए गए हैं.

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सबसे प्रभावशाली संगठन

रिपोर्ट में दावा किया गया है कि ये संगठन सबसे प्रभावशाली थिंक टैंक है. ये देश विदेश के उद्योगपतियों और कॉर्पोरेट्स को सरकारी नीतियों पर चर्चा के लिए मंच उपलब्ध करवाने का काम करता है. संस्थान के मंच पर बड़े कारोबारी से लेकर केंद्रीय मंत्री और वरिष्ठ अधिकारी आपस में मिलते-जुलते रहते हैं.

केन्द्रीय मंत्री भी हैं संगठन का हिस्सा

दावा ये भी है कि इस’इंडिया फाउंडेशन’ को शौर्य डोवल बीजेपी के राष्ट्रीय महासचिव राम माधव के साथ मिलकर चलाते हैं. इसके निदेशक मंडल में रक्षा मंत्री निर्मला सीतारमण, वाणिज्य मंत्री सुरेश प्रभु और नागरिक उड्डयन राज्यमंत्री जयंत सिन्हा के साथ-साथ विदेश राज्यमंत्री एम जे अकबर भी हैं.

इस वजह से खड़े हो रहे सवाल

रिपोर्ट में दावा किया गया है कि फाउंडेशन का न दिखने वाला वित्तीय लेन-देन और मोदी कैबिनेट के वरिष्ठ मंत्रियों का इसमें डायरेक्टर होना अपने आप में ही कई तरह के सवाल खड़े करने के लिए पर्याप्त है. शौर्य इस संगठन के एक्जीक्यूटिव डायरेक्टर हैं और इसके अलावा एक ऐसी वित्तीय संस्था जेमिनी फायनेंशियल सर्विसेस के नाम से चलाते हैं, जिसका काम एशियाई और दूसरे देशों की अर्थव्यवस्थाओं के बीच लेनदेन का काम करना है. रिपोर्ट में इन तथ्यों की दलील देते हुए हितों के टकराव का दावा भी किया गया है.

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बैलेंसशीट नहीं की सार्वजनिक

वेबसाइट का ये भी दावा किया है कि ये संस्थान एक ट्रस्ट चलाता है. ऐसे में कानूनी तौर पर उसके लिए बैलेंसशीट सार्वजनिक करना जरूरी भी नहीं है. संस्थान से केंद्रीय मंत्रियों के जुड़े होने के बावजूद उसने इनकम सोर्स बताने से इनकार किया है.

फाउंडेशन से जुड़े 6 लोगों से वेबसाइट ने इस संबंध में सवाल पूछे. लेकिन किसी भी सवाल का जवाब नहीं दिया गया. हालांकि, वेबसाइट में ये भी लिखा गया है कि शौर्य ने कॉन्फ्रेंस, विज्ञापन और जर्नल से फाउंडेशन को कमाई होने की बात स्वीकारी है.

स्वतंत्र रिसर्च केंद्र

इंडिया फाउंडेशन खुद को एक स्वतंत्र रिसर्च केंद्र बताता है. इसका मुख्य कार्यक्षेत्र भारतीय राजनीति के मुद्दों, चुनौतियों और अवसरों का अध्ययन करना है. अगर ये बात किसी भी तरह साबित हो जाती है कि वेबसाइट में किये दावे सही हैं. तो निश्चित रूप से भाजपा को इससे नुकसान हो सकता है.

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