ट्रेन में सफ़र करना किसको नहीं अच्छा लगता. अधिकतर लोगों को रेल में खिड़की के पास वाली सीट पर बैठ कर सफ़र करना अच्छा लगता होगा. ट्रेन में खाने-पीने की काफी सर्विसेज भी मिलने लगी हैं. पर क्या आप जानते हैं राजधानी और शताब्दी में चाहे आप खाना खाएं या न खाएं आपको पैसे चुकाने ही पड़ते हैं. लेकिन अब यात्रियों को एक सुविधा दी जा रही है. अब राजधानी और शताब्दी के यात्रियों को खाने लेने या न लेने का ऑप्शन भी मिलेगा.

राजधानी और शताब्दी

आप ट्रेन में सफ़र कर रहे हैं तो रेल यात्रा के रूल्स जानना भी ज़रूरी है. तो आइए हम आपको रेल यात्रा के रूल्स बताते हैं.


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  • TTE यानि ट्रेवल टिकट एग्जामिनर आपको रात 10 बजे के बाद डिस्टर्ब नहीं कर सकता है. TTE को सुबह ६ बजे से रात 10 बजे के बीच ही टिकटों का वेरिफिकेशन करना ज़रूरी है. रात में सोने के बाद किसी भी यात्री को परेशान नहीं किया जा सकता है. यह गाइडलाइन रेलवे बोर्ड द्वारा दी गयी है.

  • ट्रेन में सफर के दौरान कई यात्रियों को ये चिंता रहती है कि अगर वो सो गये और स्टेशन पर नींद नहीं खुली तो कहीं उनकी ट्रेन निकल न जाए. रेलवे की कई सर्विस में से वेकअप कॉल डेस्टिनेशन भी है. इस सर्विस में आपको 139 नंबर पर फ़ोन करके वेकअप कॉल डेस्टिनेशन अलर्ट को एक्टिवेट करना होगा. फिर स्टेशन आने से पहले रेलवे आपको कॉल करके जगा देगा.
  • रेलवे के रिजर्वेशन फॉर्म में दिव्यांगों और थर्ड जेंडर को पहचान देने के लिए कॉलम जोड़ा गया है. दिव्यांग यदि अकेला सफर करता है तो फॉर्म में वह इस बात का उल्लेख कर सकता है. इससे संबंधित दिव्यांग को लोअर बर्थ मिलेगी. वहीं कोई प्रेग्नेंट वुमन है तो वह भी रिजर्वेशन फॉर्म में इस ऑप्शन पर मार्क कर सकती है. इससे महिला को लोअर बर्थ मिलना कंफर्म हो जाता है.
  • रिजर्वेशन होने के बाद भी अगर ट्रेन मिस हो जाती है तो TTE आपकी सीट अगले दो स्टेशन तक किसी को अलॉट नहीं कर सकता. दो स्टेशन के बाद आरएसी के यात्री को सीट दी जा सकती है. ट्रेन मिस हो गई तो आप टीडीआर फाइल कर सकते हैं. ऐसे में बेस फेयर का 50 परसेंट तक वापस मिल जाता है.

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