उत्तरप्रदेश के हापुड़ जिले में एक ऐसा गांव बसा हुआ है जहां मंदिर और मस्जिद एक नींव पर टिकी हैं. देहरा नामक इस गांव की ये मंदिर-मस्जिद देशभर में अमन और प्यार का संदेश देती है. गांव में रहने वाले दोनों धर्मों के लोग एक दूसरे के साथ भाईचारे और प्रेम के साथ रहकर देश में एकता की मिसाल कायम करते हैं. जब यहां नमाज का समय होता है तो मंदिर में आरती नहीं होती है और जब मंदिर में आरती का समय होता मस्जिद के लाउड स्पीकरों को बंद कर दिया जाता है. कई बार समय एक होने के कारण दोनों जगहों पर प्रेम और शांति से प्रार्थना की जाती है.

मंदिर और मस्जिद एक नींव

हापुड़ जिले के साठा क्षेत्र में आने वाले इस गांव में करीब 95 प्रतिशत मुस्लिम आबादी है लेकिन यहां पर रहने वाले लोग सभी धर्मों को बराबर का सम्मान देते हुए एक दूसरे के साथ प्रेम से रहते हैं. बड़े त्योहार दिवाली और ईद जैसे मौके पर पूरा गांव एक साथ खुशियां मनाता है. दिवाली के दिन मस्जिद के इमाम मोहम्मद शौकीन मंदिर के पुजारी श्याम दास को शुभकामनाएं देते हैं तो पुजारी जी ईद के मौके पर मीठी सेवईयों का लुत्फ उठाते हैं.


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गांव के मिरचियान मौहल्ले में पड़ने वाले इस मंदिर-मस्जिद के सामने स्थित घर के मुखिया मुहम्मद हसन (70) का कहना है कि गांव में कभी कोई भी हिंदू या मुस्लिम भाई के बीच धर्म को लेकर विवाद नहीं हुआ है. गांव के सभी लोग एक दूसरे की संस्कृति का पूरा सम्मान करते हैं. धर्मों को पीछे छोड़कर यहां लोग बिना स्वार्थ एक दूसरे की इज्जत करते हैं. जहां देश में धार्मिक विवादों की खबर आती हैं वहीं इस गांव की मंदिर-मस्जिद और यहां के स्थानीय लोग पूरे देश में हिंदू-मुस्लिम भाईचारा की एक बड़ी मिसाल कायम करते हैं.

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