आदित्य हेगड़े को कॉल आया कि 21 साल की प्रेगनेंट महिला को उसके खून की जरूरत है। आदित्य ने बिना कुछ सोचे तुरंत चेन्नई के लिए फ्लाइट का टिकट कराया और सीधे अपने सफर पर निकल गए। आदित्य और वह प्रेगनेंट महिला पहले कभी नहीं मिली। उन्हें एक-दूसरे के बाद में कुछ भी नहीं पता है। लेकिन आदित्य के खून में एक ऐसी खूबी है, जिसकी वजह से 21 साल की प्रेगनेंट महिला को उसकी जरूरत है। यह काम आदित्य के सिवाय कोई दूसरा आदमी नहीं कर सकता है।

प्रेगनेंट महिला

दरअसल, 34 साल के आदित्य का ब्लड ग्रुप आसानी से नहीं मिलता। उनके ब्लड ग्रुप को बॉम्बे ब्लड ग्रुप या एचएच ब्लड ग्रुप कहा जाता है। भारत में यह दस हजार लोगों में किसी एक के पास ही होता है। इस मामले में प्रेगनेंट महिला की मदद उसका पति भी नहीं कर सकता था।


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खैर, आदित्य चेन्नई पहुंचते ही एग्मोर इलाके के उस सरकारी अस्पताल की तरफ निकले, जहां वह प्रेगनेंट महिला भर्ती थी। अस्पताल पहुंचते ही उन्होंने तुंरत अपना ब्लड डोनेट किया और अगले दिन वापस अपने शहर बेंगलुरू आ गए।

आदित्य की इस कोशिश से मां और बच्चे दोनों की जान बच गई। दोनों ही पूरी तरह स्वस्थ हैं। दोनों ही आदित्य से मिल नहीं सके, लेकिन दिल से उनका शुक्रिया अदा करते हैं।

आदित्य कहते हैं कि एचएच ब्लड ग्रुप बहुत मुश्किल से मिलता है। इसी वजह से मैं उस महिला की दिक्कत समझ गया और तुरंत चेन्नई रवाना हो गया। कभी-कभी लगता है कि अगर मुझे कुछ हुआ, तो कोई मेरी मदद कैसे करेगा।

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