भारतीय रक्षा वैज्ञानिकों ने सबसे तेज सुपरसोनिक क्रूज मिसाइल ब्रह्मोस को अत्याधुनिक लड़ाकू विमान सुखोई 30 एमकेआई से सफलतापूर्वक दागने में कामयाबी हासिल करने के साथ ही इसे जल, थल और नभ में एक समान देश की रक्षा लायक बना दिया है।

सुखोई में किए गए बदलाव

इसके साथ वह उन चुनिंदा देशों के क्लब में शामिल हो गया है, जिनके पास विमान से सुपरसॉनिक मिसाइल दागने की क्षमता है। रक्षा मंत्रालय के अनुसार, ढाई टन मिसाइल को प्रक्षेपित करने के लिए ‘हिन्दुस्तान एरोनॉटिक्स लिमिटेड’ (एचएएल) ने सुखोई में बदलाव किए।

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पलक झपकते भेदती लक्ष्य

सुखोई 30 एमकेई ने बुधवार को बंगाल की खाड़ी में लक्ष्य को शत फीसदी सटीकता से नष्ट किया। ब्रह्मोस क्रूज मिसाइल की गति करीब 2.8 मैक है। इसलिए इसको रोकना दुश्मन के लिए आसान नहीं। यह पलक झपकते 290 किलोमीटर के घेरे में लक्ष्य को भेद सकती है।

2013 में ही जल में परीक्षण

इससे पहले 20 मार्च 2013 को ब्रह्मोस को पानी से 40 मीटर नीचे मौजूद पनडुब्बी से सफलतापूर्वक दागा गया। जनवरी 2016 में रूस ने पुष्टि की कि इस मिसाइल के छोटे संस्करण को पनडुब्बी में लगाया जाएगा।

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अब आकाश में भी साधा निशाना

25 जून 2016 को पहली बार सुखोई-30 एमकेआई ने भारी ब्रह्मोस मिसाइल के साथ उड़ान भरी थी। 22 नवंबर 2017 को सुखोई लड़ाकू विमान ने सफलतापूर्वक ब्रह्मोस से लक्ष्य को सटीकता से दागा

बेमिसाल ब्रह्मोस का करार वार

ब्रह्मोस का वजन 2500 से 3000 किलो तक होता है। 8.4 मीटर होती है इस मिसाइल की लंबाई। 450 किलोमीटर तक है इसकी मारक क्षमता, जो 600 किमी तक बढ़ाई जा सकती है। 3400 से 3700 किलोमीटर प्रति घंटे की रफ्तार से करती है दुश्मन पर वार।

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