भारत आजकल जापान से गाढ़ी दोस्ती का दम भर रहा है। उसके सहयोग से बुलेट ट्रेन चलाने की तैयारी कर रहा है। पर, सवाल यह है कि भारत अपनी वर्तमान ट्रेन सेवा को जापान की तर्ज पर समय की पटरी पर कब लाएगा। कब भारत में ट्रेनों को लेकर जवाबदेही तय होगी।

महज 20 सेकेंड पहले रवाना हो गई ट्रेन

यह सवाल इसलिए, क्योंकि जापान में ट्रेनों के मामले में सेकेंड्स में जवाबदेही तय है। अब तो वहां का सबसे शानदार मामला सामने आया है। जापान में ट्रेनों का परिचालन करने वाली कंपनी ने महज इसलिए माफी मांगी है, क्योंकि ट्रेन 20 सेकेंड पहले स्टेशन से रवाना हो गई थी।

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भारत में ऐसी जवाबदेही की कल्पना नहीं

अब तो आप समझ ही गए होंगे कि हम कहना क्या चाहते हैं। हम कहना यही चाहते हैं कि ऐसी जवाबदेही भारत में क्यों नहीं। यात्री सुविधाओं के नाम पर किराया तो बढ़ रहा, पर ट्रेनें दो-दो दिन विलंब से चल रही हैं।

खुद जापान ऐसी जवाबदेही पर हैरान

उधर, समय पालन और अपनी शिष्टता के लिए जाना जाने वाला खुद जापान भी इस घटना से हैरान है। तोक्यो और उसके उत्तरी  उपनगरों को जोड़ने वाली सुकुबा एक्सप्रेस ट्रेन मिनामी नगरेयामा स्टेशन से 9:44:40 की बजाय 9:44:20 पर रवाना हो गई।

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सुकुबा एक्सप्रेस कंपनी ने मांगी माफी

इसके बाद सुकुबा एक्सप्रेस कंपनी ने माफी मांगी। इसमें कहा गया कि यात्रियों को हुई भारी परेशानी के लिए हम बहुत अधिक माफी चाहते हैं। हालांकि फर्म का कहना है कि इस संबंध में किसी यात्री ने कोई शिकायत नहीं की है। इस घटना के कारण किसी यात्री की ट्रेन नहीं छूटी थी।

किसी को नहीं हुई दिक्कत, फिर भी माफी

भाई यह जवाबदेही की हद नहीं तो और क्या है कि जब न तो किसी की ट्रेन छूटी और न ही किसी ने शिकायत ही की, फिर भी कंपनी ने माफी मांगी। दूसरी ओर, भारत में ट्रेनें घंटों लेट हों या दिनों, सिर्फ स्टेशनों पर एनाउंसमेंट सिस्टम माफी मांगता है।

ट्रेन लेट होने पर जारी करते हैं लेटर

वहीं, जापान में ट्रेनों के लेट होने का अधिकतम औसत समय 55 सेकेंड है। हद तो इस बात की है कि कोई ट्रेन लेट होने पर परिचालन कंपनी अपनी ओर से यात्रियों को लेटर देती है कि हां, उसकी ट्रेन लेट थी। इसे यात्री अपने दफ्तरों में दिखाते हैं कि वे लेट नहीं थे, ट्रेन लेट थी।

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