विश्व मौसम विज्ञान संगठन द्वारा प्रतिवर्ष 23 मार्च को ‘विश्व मौसम विज्ञान दिवस’ मनाया जाता हैं. इस दिवस के आयोजन का मुख्य उद्देश्य लोगों को मौसम विज्ञान तथा इसमें हो रहे परिवर्तन के बारे में जागरूक करना है. वर्ष 1950 में विश्व मौसम संगठन (WMO) की स्थापना सयुंक्त राष्ट्र की एक इकाई के रूप में की गई थी. जिनेवा में इसका मुख्यालय खोला गया था. मानव के दुःख-दर्द को कम करना और संपोषणीय विकास को बढ़ाना देना ही इस संगठन का मुख्य उद्देश्य था. पहले के मुकाबले आज के समय में मौसम विज्ञान में सिर्फ मौसम विधा ही शामिल नहीं हैं बल्कि अब इसमें पूरा भू-विज्ञान शामिल हैं. मौसम विज्ञान का इस्तेमाल बाढ़, भूकंप, सुनामी और प्राकृतिक आपदाओं का अनुमान लगाने के लिए किया जाता हैं.

विश्व मौसम संगठन

विश्व मौसम विज्ञान दिवस पर विश्व के विभिन्न हिस्सों में सभाएं और अन्य कार्यक्रम आयोजित होते हैं. इन कार्यक्रम में मौसमविज्ञानी विचार एवं अनुभव बांटते हैं. इसके साथ ही कार्यक्रम में इस मुद्दे पर चर्चा करते हैं कि मौसम द्वारा उत्पन्न हो रही समस्याओं से किस प्रकार बचा जा सकता हैं और विज्ञान की सभी नई तकनीक को भारतीयों के साथ-साथ विश्व भर में मानवजाति के कल्याण के लिए कैसे उपयोग किया जाए.


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इस दिवस को मनाने का उद्देश्य मानव के सभी दुखदर्द को कम करके और उनको होने वाली मौसम सम्बन्धी सभी मुसीबतों से निजात दिलाना हैं. मौसम विज्ञान अध्ययन द्वारा दुनियाभर में जलवायु परिवर्तन की परिघटना को बेहतर समझने के लिए अंतरिक्ष में बड़ी संख्या में उपग्रह लगाए जाते हैं. इससे भारतीय वैज्ञानिक मौसम और जलविज्ञान अध्ययन करते रहते है.

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