साहब, एक रुपये का नोट सौ साल का हो गया है। एक रुपये का पहला नोट 30 नवंबर 1917 को भारत में जारी किया गया था। हालांकि, तब यह लंदन में छप कर आया था। इस पर बायीं सिल्वर क्वाइन में किंग जार्ज पंचम की तस्वीर छपी थी।

तब इतनी चांदी के बराबर था एक रुपये का नोट

भारत में भले ही 1861 से करेंसी नोट छप रहे थे पर एक रुपये का नोट 1917 में ही आया। इससे पहले एक रुपये के चांदी के सिक्के चलन में थे। 1917 में एक रुपये का नोट आया तब इसका मूल्य 10.7 ग्राम चांदी के बराबर थी। आज 10 ग्राम चांदी करीब 400 रुपये की है।


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नोट से ज्यादा सिक्के हो गए लोकप्रिय

इस हिसाब से देखा जाए तो एक रुपये की कीमत 100 साल में 400 गुना बढ़ गई है। हालांकि एक रुपये का नोट अब भी चलन में है पर उसकी जगह सिक्के ज्यादा लोकप्रिय हैं। उत्सव और दूसरे मौकों के लिए अभी भी नोट की मांग बनी रहती है।

नोट पर होते वित्त सचिव के हस्ताक्षर

साल 1917 में आए पहले नोट में ये लिखा गया था कि मैं धारक को एक रुपये देने का वचन देता हूं। पर अब ऐसा नहीं लिखा जाता। भारत सरकार जो एक रुपये का नोट जारी करती है उसपर वित्त सचिव के हस्ताक्षर होते हैं।

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1949 में बदली गई नोट की डिजाइन

1917 में आया नोट सफेद हैंडमेड मोल्डेड पेपर पर छापा गया था। इस पर तीन अधिकारियों के हस्ताक्षर थे। इस पर आठ भारतीय भाषाओं में एक रुपया लिखा गया था। 1949 में इस नोट डिजाइन बदला गया था।  अब तक 44 संस्करण आ चुके हैं 1 रुपये के नोट के।

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कीमत से ज्यादा छपाई का खर्च

बताते चलें कि 1994 में एक रुपये के नोट की छपाई बंद कर दी गई थी। 21 साल बाद 2015 में फिर से 1 रुपये के नोट की छपाई शुरू की गई थी। हालांकि, यह अपनी कीमत से महंगा पड़ता है। एक रुपये के एक नोट की छपाई का खर्च 1.14 रुपये आता है।

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