नई दिल्ली: आमतौर हर शादी में दूल्‍हा साफा बांधकर घोड़े के रथ पर दुल्‍हन के घर तक जाता है। इसका मकसद दुल्‍हन के संबंधियों को शादी में आमंत्रित करना होता है। लेकिन राजस्थान के झुंझनू ​में एक दुल्हन चर्चा का विषय बनी हुई है। जिसे देखने वालों की भीड़ लग गई। दरअसल राजस्थान के झुंझनू से सांसद संतोष अहलावत की बेटी गार्गी अहलावत दूल्हे की तरह घोड़े पर सवार होकर अपनी शादी से पहले होने वाली रस्मों को पूरा करने निकली जिसने भी यह नजारा देखा वह हैरान रह गया।

एक दुल्हन

ब्रिटेन से एमबीए करके लौटी गार्गी लोगों की रुढ़िवादी सोच को खत्म करना चाहती है। वह लोगों को संदेश देना चाहती हैं कि लड़का-लड़की एक बराबर हैं। वह अपनी शादी से पहले तीन दिन तक झुंझुनू के 150 किलोमीटर की यात्रा घोड़े की सवारी से करेंगी। गार्गी के अनुसार ग्रामीण इलाकों में लोग टीवी शो या अखबारों में पढ़ने के बजाय ऐक्शन से ज्यादा प्रभावित होते हैं। उन्होंने बताया कि उनके भाईयों और उनके बीच में कभी भेदभाव नहीं किया गया इसलिए उन्हे कभी अहसास ही नहीं हुआ कि बेटा और बेटी में फर्क होता है।


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पिछले 75 सालों से एक ही जगह पर खड़ी है ये दुल्हन

वहीं सांसद संतोष ने बताया कि वह हमेशा से समाज में जागरुकता लाने की पहल चलाती आ रही हैं। उनकी बेटी चाहती थी कि उसकी सांसद मां बेटा और बेटी को बराबरी का दर्जा दिलाने की मुहिम चलाए, इसलिए इसकी शुरुआत अपने घर से ही की। उन्होंने बताया कि उनकी बेटी को घोड़ी पर बैठा देखकर स्थानीय लोगों में भी भारी उल्लास दिखा।

एक दुल्हन

सभी ने संकल्प लिया है कि अब वे कभी भी बेटा और बेटी में फर्क नहीं करेंगी। बता दें कि राजस्थान में शादी से पहले ‘बंदोरी’ नाम की एक रस्म निभाई जाती है। इसे बिंदोरी और बिनोरी भी कहा जाता है। इस रस्म में दूल्हा दुल्हन के संबंधियों को दावत में आमंत्रित किया जाता है इसलिए दूल्हा लड़की के घर तक घोड़े की सवारी करके हुए आता है। गार्गी ने इस रस्म को बदलते हुए खुद ही रथ पर सवार होना पसंद किया वह अपने घर या एक मंदिर तक सवारी करेंगी।  सांसद की बेटी इस रस्म को निभाकर समाज के संदेश देना चाहती है कि बेटा और बेटी में कोई फर्क नहीं है।

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