आतंकवाद के जनक और पनाहगाह पाकिस्तान की विश्व भर से आलोचनाओँ का सामना करना पड़ रहा है। यहां तक कि अब उसका सबसे बड़ा मददगार और दुनिया का सबसे ताकतवर मुल्क अमरीका भी उसे बर्दाश्त नहीं कर पा रहा है औऱ मदद रोक दी है।

पाकिस्तान को कोई आर्थिक मदद नहीं

अमरीकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने तो यहां तक कह दिया है कि आतंकवाद से लड़ने के लिए पाकिस्तान को कोई आर्थिक मदद नहीं मिलेगी। उन्होंने खुले शब्दों में कहा है कि पाकिस्तान ने अब तक आतंकवाद के खिलाफ कोई ठोस कदम नहीं उठाया है।

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ट्रंप प्रशासन ने शुरू की कार्रवाई

अमरीकी राष्ट्रपति ट्रंप ने केवल बयान ही नहीं दिया बल्कि उनके प्रशासन ने कार्रवाई भी शुरू कर दी है। अमरीका ने पाकिस्तान को दी जाने वाली 255 मिलियन डॉलर की सैन्य सहायता पर रोक भी लगा दी है।

इतनी भारी रकम के बावजूद कार्रवाई नहीं

डोनाल्ड ट्रंप ने कहा है कि अमरीका पिछले 15 सालों में पाकिस्तान को 33 अरब डॉलर से ज्यादा की सहायता दे चुका है, यानी आतंकवाद पर लगाम लगाने के लिए पाकिस्तान को पिछले डेढ़ दशक में अमरीका से 208461 करोड़ रुपए की मदद मिल चुकी है।

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पाक से अमरीका हुआ नाखुश

इसके बावजूद आंतकवाद पर लगाम लगाने की कोशिशों को लेकर पाकिस्तान के रुख  से अमरीका नाखुश है। बताते चलें कि पाकिस्तान का डिफेंस बजट सालाना 8.7 अरब डॉलर है। इसका चार गुना ज्यादा को वह 15 साल में अमरीका से ही वसूल चुका है।

भारत विभाजन से ही पाक संग अमरीका

जानने की बात यह भी है अंग्रेजों की नीतियों की वजह से भारत विभाजन के बाद अस्तित्व में आए पाकिस्तान को उसके गठन से ही अमरीका मदद देता आ रहा है। हद यह कि 2001 में अमरीका पर आतंकी हमले के बाद यूएस ने पाकिस्तान को मदद का भंडार खोल दिया।

67 बिलियन डॉलर की मदद का दावा

अमरीका के एक रिसर्च थिंक टैंक सेंटर फॉर ग्लोबल डवलवमेंट की रिपोर्ट में इस बात का खुलासा किया गया है कि 1951 से लेकर 2011 तक अलग-अलग मदों में अमरीका ने पाकिस्तान को 67 बिलियन अमरीकी डॉलर की मदद दी है।

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बराक ओबामा ने बनाया था कानून

अमरीका के पूर्व राष्ट्रपति बराक ओबामा के मन में पाकिस्तान के प्रति खास सहानुभूति नजर आती थी। उनके शासनकाल में 2009 में पाकिस्तान की मदद के लिए कैरी लुगर विधेयक (एनहेन्स्ड पार्टनरशिप विद पाकिस्तान एक्ट ऑफ 2009) पास किया गया।

व्यापक समर्थन की ठोस अभिव्यक्ति

इसके माध्यम से आगामी पांच सालों (2010-14) में साढ़े सात अरब अमरीकी डालर की असैनिक मदद वाले कैरी लुगर विधेयक को व्हाइट हाउस ने पाकिस्तान के लिए व्यापक समर्थन की ठोस अभिव्यक्ति बताया था।

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2002 में 2 अरब डॉलर, 2003 में 1.3 अरब डॉलर, 2004 में 1.1 अरब डॉलर, 2005 में 1.7 अरब डॉलर, 2006 में 1.8 अरब डॉलर, 2007 में 1.7 अरब डॉलर, 2008 में 2.1 अरब डॉलर, 2009 में 3.1 अरब डॉलर, 2010 में 4.5 अरब डॉलर, 2011 में 3.6 अरब डॉलर 2012 से 14 तक 6.1 अरब डॉलर।

वर्ल्ड ट्रेड पर हमले के बाद खुलकर की मदद

उल्लेखनीय है कि आतंकवाद के खिलाफ लड़ने के लिए अमरीका ने वर्ल्ड ट्रेड सेंटर पर हमले के बाद खुलकर पाकिस्तान की मदद की। इस मदद में बजट का बड़ा हिस्सा सैन्य मदद के तौर पर दिया गया है या इस्तेमाल किया गया है।

शिक्षा और मदों में एक चौथाई मदद

हैरत की बात तो यह है कि शिक्षा और दूसरे मदों में सैन्य मदद का एक चौथाई फंड दिया गया। सेंटर फॉर ग्लोबल डवलवमेंट के मुताबकि, वित्तीय वर्ष 2002 से 2009 के बीच आर्थिकी से जुड़े मदों में सिर्फ 30 फीसदी फंड दिया गया है।

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सैन्य क्षेत्र में सबसे अधिक सहायता

इसके अनुसार, 70 फीसदी मदद तो केवल सैन्य क्षेत्र में दी गई है। वहीं 2010 से 2014 के बीच सैन्य मदद में थोड़ी कमी आई है और आर्थिक और सामाजिक क्षेत्रों में कुल मदद का करीब 41 फीसदी दिया गया।

पाकिस्तान ने अमरीका को बनाया मूर्ख

अब अमरीकी राष्ट्रपति ट्रंप ने कहा है कि आतंकवाद के खिलाफ कार्रवाई के नाम पर पाकिस्तान ने उनके देश को अब तक मूर्ख बनाया है। अमरीका पिछले 15 सालों में पाकिस्तान को 33 अरब डॉलर से ज्यादा की सहायता दे चुका है।

पाकिस्तान कर रहा बड़ा दावा

दूसरी ओऱ, पाकिस्तान भी आतंकवाद के खिलाफ लड़ाई में बड़े खर्च के दावे करता है। मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, पाकिस्तान ने दावा किया है कि 2001 के बाद आतंक के खिलाफ लड़ाई में उसने 80 बिलियन डॉलर खर्च किया है।

कई आतंकियों को अतरराष्ट्रीय खतरा बताया

हाफिज सईद, सैयद सलाउद्दीन जैसे आतंकवादी चेहरों को अमरीका अंतरराष्ट्रीय आतंकी घोषित कर चुका है और पाकिस्तान से उनके खिलाफ कार्रवाई का आह्वान कर चुका है, बावजूद इसके आतंकियों को पाकिस्तान की मदद के केस सामने आ रहे हैं।

मदद में की जा रही कटौती

ट्रंप राज आने के बाद से ही लगातार पाकिस्तान को मदद में कटौती की जा रही है। अब ट्रंप ने नए साल के अपने पहले ट्वीट में ‘नो मोर’ कहते हुए पाकिस्तान को 255 डॉलर (करीब सवा 1600 करोड़ रूपये से ज्यादा) की सैन्य मदद रोक दी है।

मोदी सरकार ने निभाया अहम रोल

डोनाल्ड ट्रंप के राष्ट्रपति बनने के बाद से पिछले कुछ वक्त से पाकिस्तान की मदद में अमरीका लगातार कटौती कर रहा है। मोदी सरकार आने के बाद भारत लगातार अमरीका और यूएन जैसे अंतरराष्ट्रीय मंचों पर आतंकवाद के खिलाफ लड़ाई के बजाय उन्हें अपनी धरती पर पनाह देने के लिए एक्पोज करता रहा है, जिससे पाकिस्तान का दूसरा चेहरा दुनिया के सामने बेनकाब हुआ है।

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