हाल ही में हुई कासगंज हिंसा ने सबको दहलाकर रख दिया है. जिसे देखिये सबकी जुबान पर इसी की चर्चा है. ऐसे समय में एक सेलेब्रिटी का ये बताना कि दंगों के दौरान दूसरे धर्म ने उनकी जान बचाई थी, लोगों को राहत जरूर दे सकता है. दरअसल अनुपम खेर को दिए एक इंटरव्यू में ये बातें जाने माने सेलेब्रिटी शेफ विकास खन्ना ने बताईं. विकास ने इस इंटरव्यू में बताया कि दंगों के दौरान जब वे फंस गए थे तब उन्हें एक मुस्लिम परिवार ने बचाया था.

विकास का ये वीडियो 2017 का है, लेकिन कासगंज हिंसा के बाद एक बार फिर ये वीडियो वायरल हो रहा है. इंटरव्यू में विकास ने बताया- ‘मुंबई के होटल शीरॉक्स में 1992 में दंगों के दौरान रूम सर्विस का उन्हें मौका मिला. 1 नवंबर को उन्होंने होटल ज्वाइन किया. पहली बार घर से निकले बच्चों को ज़्यादा जानकारी नहीं होती. वह शीरॉक्स में काम कर रहे थे और बाहर राइट्स हो रहे थे और कर्फ्यू लग गया था.’


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विकास बताते हैं कि, होटल का स्टाफ बाहर नहीं जा सकता था. मेहमानों को भी देखना ज़रूरी था. इसलिए स्टाफ से कहा गया कि बाहर नहीं जाना है, क्योंकि नया स्टाफ आ नहीं सकता. रूम सर्विस का सामान खत्म होना शुरू हो गया.’ विकास बताते हैं, ‘उनका काम अंडे-दालें बनाने का होता था. अचानक किसी ने कहा- घाटकोपर में आग लग गई, और लोग जल रहे हैं.’

विकास बताते हैं कि, उनका भाई घाटकोपर में रहा करता था. आग की बात सुनते ही उन्होंने यूनीफॉर्म फेंकी और होटल से बाहर निकलकर आये. ट्रक सप्लाई वाले जा रहे थे, तो विकास ने उनसे लिफ्ट ली. खास स्टेशन पर कोई ट्रेन नहीं चल रही थी. पता करते-करते घाटकोपर की तरफ वे बढ़ते गए.

विकास का कहना है, हर जगह दंगे-फसाद हो रहे थे. एक जगह क्रॉस सेक्शन बहुत ज्यादा था. वहां एक मुस्लिम फैमिली ने कहा- ‘क्या कर रहे हो बेटा?’ विकास कहते हैं, ‘मेरा जवाब था कि मेरा भाई घाटकोपर में है, मेरे को रास्ता नहीं समझ आ रहा. चलते-चलते दो-ढाई घंटे हो चुके हैं.’ विकास बताते हैं इतना सुनने के बाद उन्होंने कहा- ‘अंदर आ, बाहर भीड़ है.’ उसी समय भीड़ पूछने के लिए आई कि ये किसका बेटा है?’ विकास बताते हैं कि, ‘मुझे अच्छी तरह याद है उनके घर में , दो बेटे, एक बेटी और उनका जमाई घर में था. उन्होंने कहा कि ये मेरा बेटा है, अभी बाहर से आया है. उन्होंने पूछा- ‘मुस्लिम है?’ उन्होंने कहा- ‘हां’.’ विकास बताते हैं कि वो मंजर वो आज भी नहीं भूले हैं.

विकास बताते हैं, ‘मैं डेढ़ दिन उनके घर में रहा. मुझे नहीं याद कि वे कौन थे, मुझे कोई डायरेक्शन याद नहीं है. उन्होंने अपने जमाई को भेजा पता करने के लिए कि मेरा भाई ठीक है? वह मेरे जीवन की सबसे बड़ी बात है. डेढ़ दिन उनके घर फ्लोर पर सोना, और वे अपने बच्चे की तरह सुरक्षा कर रहे थे. विकास बताते हैं कि, इस बात के लिए वे 1992 से लेकर आजतक हर रमजान में एक रोजा रखते हैं कि भगवान अल्लाह खुदा ऐसे नेक बंदों को महफूज रखना.’

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